प्रधानसेवक के नाम काफिरानंद की पाती -१
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प्रधानसेवक के नाम काफिरानंद की पाती -१
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आदरणीय मोद्यानंद आत्ममुग्धानंद जी महाराज,
सादर प्रणाम!
चूंकि आप सेवातीर्थ धाम के प्रधानसेवक हैं तो यही ठीक लगा कि मेटा- प्रदत्त इस इलेक्ट्रॉनिक पोस्टकार्ड द्वारा ही आपसे संवाद किया जाए। वैसे भी अब लुकाने - छिपाने के लिए है ही क्या ! गए माघ उनतीस दिन बाकी।
मुझे ईश्वर पर विश्वास है कि उनकी कृपा से दिन में कुछ पल के लिए ही सही आप पौंड्रक सिंड्रोम (आत्ममुग्धता) से बाहर आते होंगे। इसी विश्वास के साथ आपसे कहना है कि मैं भाजपा नेतृत्व के कांग्रेसीकरण पर दंग हूँ। आपके लोग यह समझाने लगे हैं कि भाजपा गई तो कांग्रेस आ जाएगी।
श्रीमन् , अभी तो नेतृत्व की सिर्फ आलोचना हुई है जो आपसे सहन नहीं हो रही। मने कि आप पूरी तरह कांग्रेस - कम्युनिस्ट हो चुके हैं। टू इन वन । इस लिहाज से तो आपकी पार्टी की आलोचना का असली मतलब कांग्रेस के पीछे चट्टान की तरह खड़े यूरोईसाई- कम्युनिस्ट- जिहादी गिरोह की आलोचना हुई न?
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थोक वोट के लिए उत्पीड़क - पीड़ित की फेक कांग्रेसी नैरेटिव को आप खुद ही अपना चुके हैं। आप SC - ST अधिनियम को न्यायसम्मत बनाने वाले २०१८ के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देते हो, फिर समाज तोड़क यूजीसी दिशानिर्देश लाते हो। उधर मुँह के अतिसार का शिकार संघ नेतृत्व बिना मांगे दो सौ साल के लिए आरक्षण की बात करता है।
फिर आपमें और कांग्रेस के बीच जैविक परिवारवाद के सिवा क्या अंतर रहा ? अधार्मिकता, पाखण्ड और देशतोड़क बुद्धि में तो आप उनसे भी आगे निकल गए। गुरु गुड़ और चेला चीनी, है न? इसलिए कांग्रेस - वांग्रेस की सत्ता-वापसी वाली बचकानी धमकी से बाज़ आइए।
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मुद्दे की बात यह है कि अगर नेतृत्व को नहीं बदलना है तो अपनी वामीस्लामी - ईसाई सोच बदलें कि 'किसी के साथ अन्याय करके ही दूसरे के साथ न्याय हो सकता है'! आप अपने नेतृत्व का दिमागी इलाज कराएं। आपमें सेकुलर दास की आत्मा प्रविष्ट कर गई है। किसी धार्मिक तांत्रिक से मिलें, वो बुखार झार देगा। बीमारी आपको है तो आपका वोटर क्यों इलाज करवाए? मने कुछ भी यों ही:
" जनता को गोली मार दो
जनता प्रतिक्रियावादी हो गई है।"
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जनता अपना भला बुरा समझती है इसलिए २०१४ में आडवाणी जी की भाजपा की जगह आपकी भाजपा को ले आई। और इधर आप हैं कि कांग्रेस मुक्त भारत का चकमा देकर खुद ही कांग्रेसी हो लिए। नई बोतल में पुरानी शराब?
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जैसे नेहरू और उनकी बेटी के स्वर्ग सिधारने पर यह नैरेटिव बनाया गया कि अब देश में अराजकता आ जाएगी, वैसा ही आप करवा रहे हैं। यह याद दिलाने की जरुरत तो नहीं कि नेहरू - इंदिरा के जाने के बाद देश बेहतर हुआ है, तन और मन दोनों से? आडवाणी जी के मार्गदर्शक मंडल में जाने और आपके आने के बाद भी देश आगे बढ़ा है। बस एक पेंच है:
'आपका नवजागृत हिंदू वोटर राजधानी एक्सप्रेस पर सवार है लेकिन आपकी राजनीति बार - बार उसका वैकम खोल दे रही है क्योंकि आपके तौर-तरीके लोकल ट्रेन वाले हैं'!
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इसलिए श्री श्री १००८ श्री मोदीप्रिय जी महाराज! आप दो में से एक काम करिए: या तो खुद को बदलिए या नेतृत्व को। ऐसा नहीं हुआ तो आपके भक्त - वोटर अपना भगवान ही बदलने के लिए कृतसंकल्प हो जायेंगे। वैसे वह भगवान ही कैसा जो अपने भक्तों के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हो।
इसका पहला लक्षण होगा कि मोदीभक्त के नाम से प्रख्यात लोग आपके बारे में बोलना ही बंद कर देंगे। दूसरा कि वे ऐसे नेता की तलाश करेंगे जो आपकी तरह कालनेमी न होकर सच्चा धार्मिक हो। जिसका सिर्फ कपड़ा ही नहीं, मन भी धार्मिक हो।
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इसलिए हे मास्टरस्ट्रोकी आत्ममुग्धानंद स्वामी, धर्म के पीछे हाथ धोकर पड़ने के बजाय धार्मिक बनिए, सत्ता रहे चाहे जाए। अपनी कुर्सी के साथ ही स्वर्गारोहण की कामना को त्याग अपने ही बनाए मार्गदर्शक मंडल का रुख कीजिए। कम से कम सम्मान से आप याद तो किए जाएंगे!
आपका एक शुभचिंतक,
काफिरानंद - सह - पूर्व सेकुलरदास
© चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह

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