सलीम वास्तविक पर जानलेवा हमले से उठते सवाल
एक्स मुस्लिम (मुर्तद) सलीम वास्तविक की लगभग हत्या हो चुकी है। कोई ईश्वरीय चमत्कार ही उनको बचा सकता है। प्राणघाती हमले के बाद जबतक वे जीवित हैं वह भी किसी चमत्कार से कम नहीं है।अनगिनत लोगों प्रार्थनाएं उनके लिए प्राणवायु का काम कर रही हैं।
इसी के साथ कुछ सवाल उठते हैं:
१. सलीम वास्तविक पर जानलेवा हमला क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश में कानून - व्यवस्था की खराब स्थिति का प्रमाण है?
२. अगर ऐसा है तो दिल्ली समेत भारत के किस कोने में उत्तर प्रदेश से बेहतर कानून व्यवस्था की स्थिति है?
३. अगर यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है तो फिर क्या है ?
४. अब इसमें क्या मजहबी समाज की बुनियादी मान्यताओं की ही भूमिका है या गैर - मजहबी व्यापक समाज की भी भूमिका है?
५. क्या यह गैर - मजहबी समाज सनातन वैश्विक मूल्यों की दृष्टि से मजहबी समाज की बुनियादी मान्यताओं पर प्रश्न उठा रहा है?
६. अगर नहीं तो उपरोक्त भूमिका से पलायन के क्या संस्थागत कारण हैं?
७. क्या ये कारण हमेशा से मौजूद थे या आजादी की लड़ाई के दौरान के लोकप्रिय जन्मना हिंदू नामधारी नेताओं की अदूरदर्शितापूर्ण मुस्लिम - तुष्टिकरण की नीति से पैदा हुए?
८. अगर इस स्थिति की जड़ें आजादी की लड़ाई की दोषपूर्ण रणनीति से जुड़ी हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस्लाम के आधार पर भारत से अलग एक देश पाकिस्तान बन गया, तो फिर आजादी के बाद यह स्थिति क्यों कायम रही?
९. जिन राजनीतिक पार्टियों ने इस स्थिति को बनाए रखकर अपना सत्तास्वार्थ साधा, २०१४ से वे कैसे केंद्र की सत्ता से बाहर हैं?
१०. फिर मोदी की भाजपा जो तुष्टिकरण के विरोध और हिंदू नवजागरण की लहर पर सवार होकर २०१४ से लगातार केंद्र की सत्ता में है, उसने इस स्थिति को राष्ट्रहित में बदलने के लिए क्या - क्या ठोस कदम उठाए?
११. यह भी कि तुष्टिकरण की नीति को व्यापक सामाजिक स्तर पर चुनौती देने के लिए गैर - मुस्लिम समुदायों खासकर हिंदुओं की एकता को दृढ़ से दृढ़तर बनाने में सत्ताधारी दल, उसके नेता और संघ ने क्या अपनी सार्थक संस्थागत भूमिका निभाई है?
आपसे आग्रह है कि देश और राष्ट्र के दीर्घकालिक हित के मद्देनजर अपनी राय दें।

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