Tuesday, April 16, 2019

हिन्दू दोषी होने का मतलब भारत-द्वेषी होना भी है, कैसे?

हिन्दू-द्वेषी = भारत-द्वेषी = मानवता-विरोधी

मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हमें किसी धर्मग्रंथ ने नहीं कहा है कि किसी बच्ची या महिला को सेक्स ग़ुलाम बनाना हलाल है; उससे बलात्कार हलाल है सिर्फ इसलिए कि वह दूसरे मजहब या धर्म से है जैसे कि यजीदी महिलाओं और बच्चियों के साथ आईएसआईएस ने किया।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हमें किसी धर्मग्रंथ ने नहीं कहा है कि 6 साल की बच्ची से शादी और 9 साल में उससे हमबिस्तर होना हलाल है क्योंकि परवरदिगार के दूत ने 52 की उम्र में निक़ाह और 55 में पति होने का जैविक रोल अदा किया था।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हमें किसी धर्मग्रंथ ने नहीं कहा है कि बलात्कार को हिन्दू और मुस्लिम में बाँटकर उसपर राजनीति की जाए।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हमें किसी धर्मग्रंथ ने नहीं कहा है कि धर्म के लिए निर्दोष की हत्या या बलात्कार हलाल है।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि अबतक हमने निर्भया का असली नाम उजागर करने की जिद नहीं की और उसके गुप्तांग में जंग लगी रॉड डालनेवाले नाबालिग के मजहब को लेकर मोमबत्ती मार्च नहीं निकाला।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि धर्म के किसी विधान की आलोचना करने, उस पर शास्त्रार्थ करने या न मानने पर कोई भी धर्मग्रंथ हत्या का आदेश नहीं देता।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हिन्दू धर्मग्रंथ अन्धविश्वास नहीं बल्कि सत्य की खोज पर बल देते हैं।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि यहाँ न अंतिम देवता, न अंतिम किताब, न अंतिम वचन और न अंतिम सत्य का कोई दावा है।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि मेरा धर्म जो हिन्दू नहीं हैं उन्हें बलात् हिन्दू बनाने और वे न मानें तो उनपर अत्याचार या उनकी हत्या करने की अनुमति नहीं देता।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि मेरा धर्म सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के साथ सहस्तित्व का पाठ पढ़ाकर मुझे एक विश्व नागरिक बनाता है जिसका अर्थ पूरे विश्व को एक परिवार मानकर चलना है।
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मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि हिन्दू-विद्वेषी होने का अर्थ सिर्फ बहुमत-द्वेषी होना नहीं बल्कि भारत-द्वेषी और विश्व-मानवता के ख़िलाफ़ खड़ा होना है।
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मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ क्योंकि मेरा धर्म मुझे निर्मोही भाव से धर्मयुद्ध की अनुमति देता है:
जब विश्व-मानवता के विचार पर ही ख़तरा उत्पन्न हो जाए;
जब सहस्तित्वविरोधी गिरोह सत्ता संस्थान का हिन्दू-विद्वेषी उपयोग करने लग जाएँ;
जब लोकतंत्र के प्रहरी ही लोकतंत्र का इस्तेमाल लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए करने लगें।
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...और 2019 का चुनाव एक धर्मयुद्ध है, धर्मयुद्ध ही है जिसमें हमें विजयी होना है क्योंकि धर्म उसी की रक्षा करता है जो धर्म की रक्षा में निर्द्वन्द्व भाव से सन्नद्ध होता है। धर्मयुद्ध-2019 का नारा है:
महादेव का युद्धघोष था 'हर हर महादेव'
भवानी की हुँकार 'हम सब हैं चौकीदार'।

©चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह
(16.4.18 की संशोधित पोस्ट)
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