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Saturday, February 28, 2026

जनता कम्युनल, देश है सेकुलर

जनता कम्युनल, देश है सेकुलर

'पीके' सेकुलर 'लज्जा' कम्युनल
रुश्दी और तस्लीमा कम्युनल
जय हो हिन्दुस्तान सेकुलर!

बाल- तिलक -अरबिन्दो कम्युनल
गाँधी-पटेल-सावरकर हिन्दू
पंडित नेहरू ठहरे सेकुलर
जय हो हिन्दुस्तान सेकुलर!

शिवा-राणा प्रताप कम्युनल
अकबर सेकुलर हेमू कम्युनल
नादिर-औरंगज़ेब सेकुलर
खिलजी-तुग़लक़-बाबर सेकुलर
जय हो हिन्दुस्तान सेकुलर!

सबकुछ मुस्लिम-ईसाई सेकुलर
कुछ-कुछ हिन्दू भी हो सेकुलर
कुछ भी हिन्दू-विरोधी सेकुलर
कुछ भी देश-विरोधी सेकुलर
जय हो हिन्दुस्तान सेकुलर!

बहुमत कम्युनल, अल्पमत सेकुलर
जनता कम्युनल देश है सेकुलर
जय हो हिन्दुस्तान सेकुलर!
(२६.२.२०१५)
              --- चन्द्रकान्त प्र. सिंह

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दिल्ली दंगा 2020: हिंदुओं से 11 सवाल

२८.२.२०२०
दिल्ली दंगा 2020: हिंदुओं से 11 सवाल
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यह देश इस्लाम के कारण बंटा था, जिहाद (direct action) द्वारा। जहाँ-जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक हुई (कश्मीर, मल्लापुरम ) वहाँ से हिंदू भगा दिए गए। पाकिस्तान के लिए वोट देनेवाले 80% मुसलमान यहीं रह गए। अब कुछ सवाल:
1. हजारों 'मिनी पाकिस्तान' का अस्तित्व का इस देश की वास्तविकता है या नहीं? 
2. आज इस देश में 1946-47 जैसे हालात हैं या नहीं?
क्या कोई भी सरकार आपको दंगों से कभी भी पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है? 
3. क्या समान्य अपराध और दंगा दोनों एक ही चीज़ हैं?
दंगा नहीं होने देना और दंगा पर काबू पाना एक ही चीज़ है क्या?
4. दंगा से बचाव की सबसे बड़ी गारंटी आत्मबल, पैनी दृष्टि और आक्रामक आत्मरक्षा की पूरी तैयारी है या सेना-पुलिस?
5. इजराइल में भी 18% मुसलमान हैं और वह दुश्मन मुस्लिम देशों घिरा भी है। बावजूद इसके वहाँ भरत की तर्ज पर दंगे क्यों नहीं होते?
6. पिछले 100 सालों में 90% से अधिक दंगे मुसलमानों ने शुरू किए, क्यों? 
7. भारत से कमज़ोर होने और हर बार हारने के बावजूद पाकिस्तान ने ही भारत पर 4 हमले क्यों किये? 
8. हर बार पाकिस्तान द्वारा भारत पर हमला किया जाना और 1947 के बाद 90% से अधिक दंगों का मुसलमानों द्वारा शुरू किये जाने में क्या समानता है?
9. दंगा रूपी कैंसर की पहचान-निदान करनेवाले और दंगाई होने में क्या फर्क नहीं है? 
10. हिंदू समाज दंगा के कारणों पर कभी खुलकर बात करता है क्या? इस नहीं बात करने का क्या कारण है?
 11. इस देश में 'हिंदू होना ही कम्युनल होना है'। ऐसे में एक औसत हिंदू की हालत क्या इराक़ की उस यजीदी महिला की तरह नहीं जो अपने बलात्कारी जिहादी को ही प्रेमी कहने के लिए मजबूर है? 
@चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह 

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प्रधानसेवक के नाम काफिरानंद की पाती -१

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प्रधानसेवक के नाम काफिरानंद की पाती -१ 
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आदरणीय मोद्यानंद आत्ममुग्धानंद जी महाराज, 
सादर प्रणाम! 
चूंकि आप सेवातीर्थ धाम के प्रधानसेवक हैं तो यही ठीक लगा कि मेटा- प्रदत्त इस इलेक्ट्रॉनिक पोस्टकार्ड द्वारा ही आपसे संवाद किया जाए। वैसे भी अब लुकाने - छिपाने के लिए है ही क्या ! गए माघ उनतीस दिन बाकी। 
मुझे ईश्वर पर विश्वास है कि उनकी कृपा से दिन में कुछ पल के लिए ही सही आप पौंड्रक सिंड्रोम (आत्ममुग्धता) से बाहर आते होंगे। इसी विश्वास के साथ आपसे कहना है कि मैं भाजपा नेतृत्व के कांग्रेसीकरण पर दंग हूँ। आपके लोग यह समझाने लगे हैं कि भाजपा गई तो कांग्रेस आ जाएगी। 

श्रीमन् , अभी तो नेतृत्व की सिर्फ आलोचना हुई है जो आपसे सहन नहीं हो रही। मने कि आप पूरी तरह कांग्रेस - कम्युनिस्ट हो चुके हैं। टू इन वन । इस लिहाज से तो आपकी पार्टी की आलोचना का असली मतलब हुआ कांग्रेस के पीछे चट्टान की तरह खड़े यूरोईसाई- कम्युनिस्ट- जिहादी गिरोह की आलोचना, है कि नहीं ? 
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थोक वोट के लिए उत्पीड़क - पीड़ित की फेक कांग्रेसी नैरेटिव को आप खुद ही अपना चुके हैं। आप SC - ST अधिनियम को न्यायसम्मत बनाने वाले २०१८ के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देते हो, फिर समाज तोड़क यूजीसी दिशानिर्देश लाते हो। उधर मुखातिसार ( Verbal Diarrhoea) का शिकार संघ नेतृत्व बिना मांगे दो सौ साल के लिए आरक्षण की बात करता है। 

फिर आपमें और कांग्रेस के बीच जैविक परिवारवाद के सिवा क्या अंतर रहा ? अधार्मिकता, पाखण्ड और देशतोड़क बुद्धि में तो आप उनसे भी आगे निकल गए। गुरु गुड़ और चेला चीनी, है न? इसलिए कांग्रेस - वांग्रेस की सत्ता-वापसी वाली बचकानी धमकी दिलवाने से बाज़ आइए। 
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मुद्दे की बात यह है कि अगर नेतृत्व को नहीं बदलना है तो अपनी वामीस्लामी - ईसाई सोच बदलें कि 'किसी के साथ अन्याय करके ही दूसरे के साथ न्याय हो सकता है'। आप अपने नेतृत्व का दिमागी इलाज कराएं। आपमें सेकुलर दास की आत्मा प्रविष्ट कर गई है। किसी धार्मिक तांत्रिक से मिलें, वो बुखार झार देगा। बीमारी आपको है तो आपका वोटर क्यों इलाज करवाए? मने कुछ भी यों ही: 
" जनता को गोली मार दो
  जनता प्रतिक्रियावादी हो गई है।" 
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जनता अपना भला बुरा समझती है इसलिए २०१४ में आडवाणी जी की भाजपा की जगह आपकी भाजपा को ले आई। और इधर आप हैं कि कांग्रेस मुक्त भारत का चकमा देकर खुद ही कांग्रेसी हो लिए। नई बोतल में पुरानी शराब। 
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जैसे नेहरू जी और उनकी बेटी के स्वर्ग सिधारने पर यह नैरेटिव बनाया गया था कि अब देश में अराजकता आ जाएगी, वैसा ही आप करवा रहे हैं। यह याद दिलाने की जरुरत तो नहीं कि नेहरू - इंदिरा के जाने के बाद देश बेहतर हुआ है, तन और मन दोनों से? आडवाणी जी के मार्गदर्शक मंडल में जाने और आपके आने के बाद देश और भी आगे बढ़ा है। बस एक पेंच है: 
'आपका नवजागृत हिंदू वोटर राजधानी एक्सप्रेस पर सवार है लेकिन आपकी राजनीति बार - बार उसका वैकम खोल दे रही है क्योंकि आपके तौर-तरीके लोकल ट्रेन वाले हैं'!  
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इसलिए हे श्री श्री १००८ श्री मोदीप्रिय जी महाराज! आप दो में से एक काम करिए: या तो खुद को बदलिए या नेतृत्व को। ऐसा नहीं हुआ तो आपके भक्त - वोटर अपना भगवान ही बदलने के लिए कृतसंकल्प हो जायेंगे। वैसे वह भगवान ही कैसा जो अपने भक्तों के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हो। 

इसका पहला लक्षण होगा कि मोदीभक्त के नाम से प्रख्यात लोग आपके बारे में बोलना ही बंद कर देंगे। दूसरा कि वे ऐसे नेता की तलाश करेंगे जो आपकी तरह कालनेमी न होकर सच्चा धार्मिक हो। जिसका सिर्फ कपड़ा ही नहीं, मन भी धार्मिक हो। 
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इसलिए हे मास्टरस्ट्रोकी स्वामी आत्ममुग्धानंद जी! धर्म के पीछे हाथ धोकर पड़ने के बजाय धार्मिक बनिए, सत्ता रहे चाहे जाए। अपनी कुर्सी के साथ ही स्वर्गारोहण की कामना को त्याग अपने ही बनाए मार्गदर्शक मंडल का रुख कीजिए। कम से कम सम्मान से आप याद तो किए जाएंगे! 
आपका एक शुभचिंतक, 
काफिरानंद - सह - पूर्व सेकुलरदास 

© चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह

खतरे में इस्लाम

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अक्का: भई, ये बता कि ये मजहब कब से खतरे में 
            है? 
बक्का: ब्रो, जब से पैदा हुआ। 
अक्का: ऐसा कबतक रहेगा? 
बक्का: जबतक दुनिया के सभी लोग मजहबी नहीं        
           हो जाते। 
अक्का: उसके बाद क्या होगा? 
बक्का: तब खुद मजहबी खतरे में आ जाएंगे। 
अक्का: फिर ये लोग कबतक खतरे में रहेंगे? 
बक्का: जबतक एक - दूसरे को खत्म नहीं कर देते। 
© चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह 
११.११.२०१७

कालनेमी के झंडे पर लिखा राम का नाम,सावधान अब सावधान!

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अजीत भारती के साथ जो हो रहा है उससे साफ है कि आज की तारीख में हिंदू नवजागरण के वाहक संगठन मुक्त बुद्धियोद्धा हैं जो संगठनबद्ध ऑफिशियल राष्ट्रवादियों के नियंत्रण से बाहर हैं। सत्ता मोह और बौद्धिक कायरता के कारण कांग्रेस बन चुकी भाजपा के नेतृत्व का इनपर कोई असर नहीं है क्योंकि वे लाभ - लोभ से परे हैं। अब इस बुद्धियोद्धा समूह से निपटने के लिए ऑफिशियल राष्ट्रवादियों ने वामीस्लामी एवेंजेलिस्ट गिरोहों से हाथ मिला लिया है, कालनेमी और रावण की तरह: 

"कालनेमी के झंडे पर 
लिखा राम का नाम,
सावधान अब सावधान!" 
© चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह 
#कांग्रेस #भाजपा #बुद्धियोद्धा #कालनेमी

जातीय रसायन और जातीय अंकगणित की भिड़ंत

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जातीय रसायन और जातीय अंकगणित की भिड़ंत 
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मोदी जी पर कभी आँख मूंदकर विश्वास करने वाले अब उनके हर कृत्य पर संदेह कर रहे हैं। अगर यह सिर्फ #यूजीसी प्रकरण के कारण होता तो थम गया होता। #मोबाइल_इंटरनेट_सोशल मीडिया पर सवार एक ऐसी पीढ़ी की बदौलत मोदी तीन बार सत्ता में आए हैं जिसने अपनी #जातीय_अस्मिताओं को घोलकर #हिंदुत्व और #राष्ट्रभक्ति का एक #रसायन बनाया था और जिसके प्रतीक थे मोदी। 
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इस बीच #आडवाणी जी #जिन्ना की मजार पर चादर चढ़ाकर उन्हें सेकुलर घोषित कर चुके थे और #मोदी जी ने सार्वजनिक रूप से #जालीदार टोपी पहनने से #इनकार कर दिया था। लेकिन मौका मिलते ही मोदी जी ने जातीय #अंकगणित की मदद से इस रसायन के तत्वों को विघटित करना चाहा , कभी प्रत्यक्ष तो कभी अप्रत्यक्ष रूप से। 
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जनवरी २०२६ के यूजीसी दिशानिर्देश तो पहले से #सुलगते_बारूद के ढेर पर चिंगारी फेंकने जैसा साबित हुए। असल में यह विरोध मोदी के जातीय अंकगणित और नवजागृत हिंदुओं के जातीय रसायन के बीच है। 
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लोगों को यह साफ लग रहा है कि मोदी और संघ अब कांग्रेस - कम्युनिस्ट - समाजवादियों के विखंडनकारी जातीय अंकगणित के प्रयोग में अव्वल हो गए हैं। अब एक ही उपाय है कि मोबाइल - इंटरनेट - सोशल मीडिया पर चीन की तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए तो मोदी जी कुछ समय और अपने #कालनेमी पाखंड को बरकरार रख सकते हैं। 
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#नवजागरण प्रेरित #हिंदुत्व और #हिंदू_एकता की राजधानी एक्सप्रेस का वैकम खोलकर मोदी और संघ अपनी #बौद्धिक_कायरता पर सार्वजनिक ठप्पा लगवा रहे हैं। 
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आप लोग बस एक काम करिए: २०१४ से लेकर अबतक की मोदी जी की तस्वीरों पर एक नजर डालिए और देखिए आपके दिमाग में किस प्राणी की तस्वीर उभर कर आ रही है? 
वन में तो शेर, व्याघ्र, चीता, हाथी, भालू, बिल्ली, बंदर, सियार और लोमड़ी समेत न जाने कितने जीव - जंतु रहते हैं। 
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आपसे कुछ सवाल भी करते चलें: 
रसायनशास्त्र और अंकगणित की भिड़ंत में मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र की भी कोई भूमिका है? 

अगर हाँ , मनोविज्ञान किसके साथ और अर्थशास्त्र किसके साथ? 

कहीं ये दोनों किसी एक ही पक्ष के साथ तो नहीं हैं? 

© चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह

सलीम वास्तविक पर जानलेवा हमले से उठते सवाल

एक्स मुस्लिम (मुर्तद) सलीम वास्तविक की लगभग हत्या हो चुकी है। कोई ईश्वरीय चमत्कार ही उनको बचा सकता है। प्राणघाती हमले के बाद जबतक वे जीवित हैं वह भी किसी चमत्कार से कम नहीं है।अनगिनत लोगों प्रार्थनाएं उनके लिए प्राणवायु का काम कर रही हैं। 
इसी के साथ कुछ सवाल उठते हैं: 
१. सलीम वास्तविक पर जानलेवा हमला क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश में कानून - व्यवस्था की खराब स्थिति का प्रमाण है? 
२. अगर ऐसा है तो दिल्ली समेत भारत के किस कोने में उत्तर प्रदेश से बेहतर कानून व्यवस्था की स्थिति है?  
३. अगर यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है तो फिर क्या है ? 
४. अब इसमें क्या मजहबी समाज की बुनियादी मान्यताओं की ही भूमिका है या गैर - मजहबी व्यापक समाज की भी भूमिका है? 
५. क्या यह गैर - मजहबी समाज सनातन वैश्विक मूल्यों की दृष्टि से मजहबी समाज की बुनियादी मान्यताओं पर प्रश्न उठा रहा है? 
६. अगर नहीं तो उपरोक्त भूमिका से पलायन के क्या संस्थागत कारण हैं? 
७. क्या ये कारण हमेशा से मौजूद थे या आजादी की लड़ाई के दौरान के लोकप्रिय जन्मना हिंदू नामधारी नेताओं की अदूरदर्शितापूर्ण मुस्लिम - तुष्टिकरण की नीति से पैदा हुए? 
८. अगर इस स्थिति की जड़ें आजादी की लड़ाई की दोषपूर्ण रणनीति से जुड़ी हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस्लाम के आधार पर भारत से अलग एक देश पाकिस्तान बन गया, तो फिर आजादी के बाद यह स्थिति क्यों कायम रही? 
९. जिन राजनीतिक पार्टियों ने इस स्थिति को बनाए रखकर अपना सत्तास्वार्थ साधा, २०१४ से वे कैसे केंद्र की सत्ता से बाहर हैं? 
१०. फिर मोदी की भाजपा जो तुष्टिकरण के विरोध और हिंदू नवजागरण की लहर पर सवार होकर २०१४ से लगातार केंद्र की सत्ता में है, उसने इस स्थिति को राष्ट्रहित में बदलने के लिए क्या - क्या ठोस कदम उठाए? 
११. यह भी कि तुष्टिकरण की नीति को व्यापक सामाजिक स्तर पर चुनौती देने के लिए गैर - मुस्लिम समुदायों खासकर हिंदुओं की एकता को दृढ़ से दृढ़तर बनाने में सत्ताधारी दल, उसके नेता और संघ ने क्या अपनी सार्थक संस्थागत भूमिका निभाई है? 

आपसे आग्रह है कि देश और राष्ट्र के दीर्घकालिक हित के मद्देनजर अपनी राय दें।